वतन की सर बुलंदी के लिए ये दिल क्या ख़ुशी ख़ुशी मिट जाए ये जिस्म भी हमारा…

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आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस

देश को आजादी के नए अफसानों की जरूरत है भगत-आजाद जैसे आजादी के दीवानों की जरूरत है, भारत को फिर देशभक्त परवानों की जरूरत है..!!

मरने के बाद भी जिसके नाम मे जान हैं, ऐसे जाबाज़ सैनिक हमारे भारत की शान है।

ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

गंगा यमुना यहाँ नर्मदा, मंदिर मस्जिद के संग गिरजा, शांति प्रेम की देता शिक्षा, मेरा भारत सदा सर्वदा..!!

ना पूछो ज़माने से क्या हमारी कहानी है हमारी पहचान तो ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं

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ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

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