सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए
मरने के बाद भी जिसके नाम मे जान हैं, ऐसे जाबाज़ सैनिक हमारे भारत की शान है।
कहते हैं अलविदा हम अब इस जहान को, जा कर ख़ुदा के घर से अब आया न जाएगा, हमने लगाई आग हैं जो इंकलाब की, इस आग को किसी से बुझाया ना जाएगा..
है नमन उनको, जो यशकाय को अमरत्व देकर, इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं, है नमन उनको, जिनके सामने बौना हिमालय, जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गये हैं..!!
मैं चैन ओ अमन पसंद करता हूँ, मेरे देश में दंगा रहने दो लाल हरे में मत बांटो, मेरी छत पे तिरंगा रहने दो
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए
मरने के बाद भी जिसके नाम मे जान हैं, ऐसे जाबाज़ सैनिक हमारे भारत की शान है।
कहते हैं अलविदा हम अब इस जहान को, जा कर ख़ुदा के घर से अब आया न जाएगा, हमने लगाई आग हैं जो इंकलाब की, इस आग को किसी से बुझाया ना जाएगा..
है नमन उनको, जो यशकाय को अमरत्व देकर, इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं, है नमन उनको, जिनके सामने बौना हिमालय, जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गये हैं..!!
मैं चैन ओ अमन पसंद करता हूँ, मेरे देश में दंगा रहने दो लाल हरे में मत बांटो, मेरी छत पे तिरंगा रहने दो