कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं..

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं..

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दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका.. जब तक दिल में जान हैं।

ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस

अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं

हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं

रवींद्र नाथ टैगोर

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका.. जब तक दिल में जान हैं।

ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस

अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं

हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं

रवींद्र नाथ टैगोर

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल