जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar
इश्क़ तो करता हैं हर कोई मेहबूब पे मरता हैं हर कोई, कभी वतन को मेहबूब बना कर देखो= तुझ पे मरेगा हर कोई……!!!!
है नमन उनको, जो यशकाय को अमरत्व देकर, इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं, है नमन उनको, जिनके सामने बौना हिमालय, जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गये हैं..!!
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो। और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो..
मरने के बाद भी जिसके नाम मे जान हैं, ऐसे जाबाज़ सैनिक हमारे भारत की शान है।
जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar
इश्क़ तो करता हैं हर कोई मेहबूब पे मरता हैं हर कोई, कभी वतन को मेहबूब बना कर देखो= तुझ पे मरेगा हर कोई……!!!!
है नमन उनको, जो यशकाय को अमरत्व देकर, इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं, है नमन उनको, जिनके सामने बौना हिमालय, जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गये हैं..!!
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
वो ज़िन्दगी ही क्या जिसमे देशभक्ति ना हो। और वो मौत ही क्या जो तिरंगे में ना लिपटी हो..
मरने के बाद भी जिसके नाम मे जान हैं, ऐसे जाबाज़ सैनिक हमारे भारत की शान है।