लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा
ना सर झुका है कभी और ना झुकायेंगे कभी जो अपने दम पे जियो असल में जिंदगी है वही
जिन की पत्नी वेकेशन करने मायके चली गई है, वो स्टेटस पर तिरंगा लगा कर अपनी आज़ादी का ऐलान कर सकते हैं।
मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…
दे सलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान है सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान है
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा
ना सर झुका है कभी और ना झुकायेंगे कभी जो अपने दम पे जियो असल में जिंदगी है वही
जिन की पत्नी वेकेशन करने मायके चली गई है, वो स्टेटस पर तिरंगा लगा कर अपनी आज़ादी का ऐलान कर सकते हैं।
मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…
दे सलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान है सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान है