फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
भारत का वीर जवान हूँ मैं, ना हिन्दू, ना मुसलमान हूँ मैं, जख्मो से भरा सीना हैं मगर, दुश्मन के लिए चट्टान हूँ मैं, भारत का वीर जवान हूँ मैं ||
हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं
मैं चैन ओ अमन पसंद करता हूँ, मेरे देश में दंगा रहने दो लाल हरे में मत बांटो, मेरी छत पे तिरंगा रहने दो
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिता हमारा
फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।
भारत का वीर जवान हूँ मैं, ना हिन्दू, ना मुसलमान हूँ मैं, जख्मो से भरा सीना हैं मगर, दुश्मन के लिए चट्टान हूँ मैं, भारत का वीर जवान हूँ मैं ||
हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं
मैं चैन ओ अमन पसंद करता हूँ, मेरे देश में दंगा रहने दो लाल हरे में मत बांटो, मेरी छत पे तिरंगा रहने दो
लिपट कर बदन कई तिरंगे में आज भी आते हैं, यूँ ही नहीं दोस्तों हम ये पर्व मनाते हैं।
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिता हमारा