हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं

हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं

रवींद्र नाथ टैगोर
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चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं

जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar

दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत मेरी मिटटी से भी खुशबू-इ-वतन आएगी. सरदार भगत सिंह

जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

जिन की पत्नी वेकेशन करने मायके चली गई है, वो स्टेटस पर तिरंगा लगा कर अपनी आज़ादी का ऐलान कर सकते हैं।

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।

चलो फिर से खुद को जागते हैं अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं सुनहरा रंग है शहीदों के लहू से ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं

जिस प्रकार पानी की एक बूंद समंदर में मिलकर अपनी पहचान खो देता है उस प्रकार इंसान जिस सोसाइटी में रहता है उसमे रहते हुए अपनी पहचान कभी नही खोता। इंसान की जिंदगी स्वतंत्र है। वह केवल अपने समाज के विकास के लिये पैदा नही हुआ बल्कि खुद का विकास करने के लिये पैदा हुआ है। B.R. Ambedkar

दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत मेरी मिटटी से भी खुशबू-इ-वतन आएगी. सरदार भगत सिंह

जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

जिन की पत्नी वेकेशन करने मायके चली गई है, वो स्टेटस पर तिरंगा लगा कर अपनी आज़ादी का ऐलान कर सकते हैं।

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।