किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता का मोल नहीं किया जा सकता| वह जीवन है| भला जीने के लिए कोई क्या मोल नहीं चुकाएगा? –

किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता का मोल नहीं किया जा सकता| वह जीवन है| भला जीने के लिए कोई क्या मोल नहीं चुकाएगा? –

महात्मा गाँधी
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मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

हम आजाद हैं, ये आजादी कभी छिनने नहीं देंगे तिरंगे की शान को हम कभी मिटने नहीं देंगे कोई आंख भी उठाएगा जो हिंदुस्तान की तरफ उन आंखों को फिर दुनिया देखने नहीं देंगे..

फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।

जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं

ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिता हमारा

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

हम आजाद हैं, ये आजादी कभी छिनने नहीं देंगे तिरंगे की शान को हम कभी मिटने नहीं देंगे कोई आंख भी उठाएगा जो हिंदुस्तान की तरफ उन आंखों को फिर दुनिया देखने नहीं देंगे..

फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।

जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं

ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी ये गुलसिता हमारा