मैं चैन ओ अमन पसंद करता हूँ, मेरे देश में दंगा रहने दो लाल हरे में मत बांटो, मेरी छत पे तिरंगा रहने दो
जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, हिंदुस्तानी एक हैं
वतन की सर बुलंदी के लिए ये दिल क्या ख़ुशी ख़ुशी मिट जाए ये जिस्म भी हमारा…
लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर..
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल
मैं चैन ओ अमन पसंद करता हूँ, मेरे देश में दंगा रहने दो लाल हरे में मत बांटो, मेरी छत पे तिरंगा रहने दो
जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, हिंदुस्तानी एक हैं
वतन की सर बुलंदी के लिए ये दिल क्या ख़ुशी ख़ुशी मिट जाए ये जिस्म भी हमारा…
लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर..
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा -मोहम्मद इकबाल