जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं

जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं वो पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं

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आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे…

संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे, हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे हम मिलजुल के रहे ऐसे की मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे…

फंदे से मोहब्बत थी हम वतन के मतवालो को।

जो लोग दूसरों को आजादी नहीं देते, उन्हें खुद भी इसका हक नहीं होता –

अब्राहम लिंकन

आजादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है सुभाष चंद्र बोस

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…

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