जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम हिंदुस्तान के वीरों का होगा।
मझहब नही सीखाता आपस मे बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा
इश्क़ तो करता हैं हर कोई मेहबूब पे मरता हैं हर कोई, कभी वतन को मेहबूब बना कर देखो= तुझ पे मरेगा हर कोई……!!!!
वंदे मातरम -बंकिम चंद्र चटर्जी
करो या मरो- महात्मा गांधी
आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi
जिक्र अगर हीरो का होगा, तो नाम हिंदुस्तान के वीरों का होगा।
मझहब नही सीखाता आपस मे बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तान हमारा
इश्क़ तो करता हैं हर कोई मेहबूब पे मरता हैं हर कोई, कभी वतन को मेहबूब बना कर देखो= तुझ पे मरेगा हर कोई……!!!!
वंदे मातरम -बंकिम चंद्र चटर्जी
करो या मरो- महात्मा गांधी
आत्मनिर्भरता वाले इंसान की तरह परस्पर निर्भरता का होना भी बहुत जरुरी है। इंसान भी सामाजिक ही है। Mahatma Gandhi