कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, हिंदुस्तानी एक हैं

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, हिंदुस्तानी एक हैं

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कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना, कभी तपती धूप में जल के देख लेना, कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की, कभी सरहद पर चल के देख लेना…

आजादी की कभी शाम ना होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम ना होने देंगे बची है जो 1 भी बूंद लहू की तब तक भारत का आँचल नीलाम ना होने देंगे

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…

शहीदों के त्याग को हम बदनाम नही होने देंगे, भारत की इस आजादी की कभी शाम नही होने देंगे।

हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं

रवींद्र नाथ टैगोर

ना पूछो ज़माने से क्या हमारी कहानी है हमारी पहचान तो ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं

कभी ठंड में ठिठुर कर देख लेना, कभी तपती धूप में जल के देख लेना, कैसे होती हैं हिफ़ाजत मुल्क की, कभी सरहद पर चल के देख लेना…

आजादी की कभी शाम ना होने देंगे शहीदों की कुर्बानी बदनाम ना होने देंगे बची है जो 1 भी बूंद लहू की तब तक भारत का आँचल नीलाम ना होने देंगे

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…

शहीदों के त्याग को हम बदनाम नही होने देंगे, भारत की इस आजादी की कभी शाम नही होने देंगे।

हम आजादी तभी पाते हैं जब अपने जीवित रहने के अधिकार का पूरा मूल्य चुका देते हैं

रवींद्र नाथ टैगोर

ना पूछो ज़माने से क्या हमारी कहानी है हमारी पहचान तो ये है कि हम हिंदुस्तानी हैं