ये अगस्त ही वो महीना है तो आजादी की याद दिलाता है उन देशभक्तों की याद दिलाता है जो देश के लिए घर परिवार सब छोड़कर बलिदान हो गये जय हिन्द….

ये अगस्त ही वो महीना है तो आजादी की याद दिलाता है उन देशभक्तों की याद दिलाता है जो देश के लिए घर परिवार सब छोड़कर बलिदान हो गये जय हिन्द….

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ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

आओ देश का सम्मान करें… शहीदों की शहादत याद करे एक बार फिर से राष्ट्र की कमान, हम हिंदुस्तानी अपने हाथ धरे, आओ स्वतंत्रता दिवस का मान करे…

किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता का मोल नहीं किया जा सकता| वह जीवन है| भला जीने के लिए कोई क्या मोल नहीं चुकाएगा? –

महात्मा गाँधी

काश मेरी जिंदगी मे सरहद की कोइ शाम आए। मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए।। ना खौफ है मौत का ना आरजु है जन्नत की लेकीन जब कभी जीक्र हो शहीदो का काश मेरा भी नाम आए।। काश मेरा भी नाम आए।

यूनान-ओ-मिस्र-ओ रोमा सब मिट गए जहाँ से। अबतक मगर है बाकि नाम-ओ-निशाँ हमारा। कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों से रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा। सारे जहा से अच्छा हिन्दूस्तान हमारा हमारा..

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।

ना मरो सनम बेवफा के लिए, दो गज़ जमीन नहीं मिलेगी दफ़न होने के लिए, मरना हैं तो मरो वतन के लिए, हसीना भी दुप्पट्टा उतार देगी तेरे कफ़न के लिए

आओ देश का सम्मान करें… शहीदों की शहादत याद करे एक बार फिर से राष्ट्र की कमान, हम हिंदुस्तानी अपने हाथ धरे, आओ स्वतंत्रता दिवस का मान करे…

किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता का मोल नहीं किया जा सकता| वह जीवन है| भला जीने के लिए कोई क्या मोल नहीं चुकाएगा? –

महात्मा गाँधी

काश मेरी जिंदगी मे सरहद की कोइ शाम आए। मेरी जिंदगी मेरे वतन के काम आए।। ना खौफ है मौत का ना आरजु है जन्नत की लेकीन जब कभी जीक्र हो शहीदो का काश मेरा भी नाम आए।। काश मेरा भी नाम आए।

यूनान-ओ-मिस्र-ओ रोमा सब मिट गए जहाँ से। अबतक मगर है बाकि नाम-ओ-निशाँ हमारा। कुछ बात है की हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों से रहा है दुश्मन दौर-ए-जहाँ हमारा। सारे जहा से अच्छा हिन्दूस्तान हमारा हमारा..

कुछ तो बात है मेरे देश की मिट्टी में साहेब, सरहदें कूद के आते हैं यहाँ दफ़न होने के लिए।