छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
नफ़रत सी हो गई हैँ इस दुनिया से, एक तुम से मोहब्बत करके
काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है
छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
नफ़रत सी हो गई हैँ इस दुनिया से, एक तुम से मोहब्बत करके
काश ये दिल बेजान होता, ना किसी के आने से धडकता ना किसी के जाने पर तडपता
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है