वंदे मातरम -बंकिम चंद्र चटर्जी

वंदे मातरम -बंकिम चंद्र चटर्जी

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ये मत पूछो की वतन ने तुमको क्या दिया ? ये सोचो कि तुमने वतन के लिए क्या किया ?

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…

खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है -अशफाकुल्लाह खा

ना सर झुका है कभी और ना झुकायेंगे कभी जो अपने दम पे जियो असल में जिंदगी है वही

मैं मुल्क की हिफाजत करूँगा ये मुल्क मेरी जान है इसकी रक्षा के लिए मेरा दिल और जां कुर्बान है..||

ना पूछो ज़माने को, क्या हमारी कहानी हैं हमारी पहचान तो सिर्फ ये हैं की हम सिर्फ हिंदुस्तानी हैं…!!

ये मत पूछो की वतन ने तुमको क्या दिया ? ये सोचो कि तुमने वतन के लिए क्या किया ?

मैं मुस्लिम हूँ, तू हिन्दू है, है दोनों इंसान, ला मैं तेरी गीता पढ़ लूँ, तू पढ़ ले कुरान, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हैं मेरा बस एक ही अरमान एक थाली में खाना खाए सारा हिन्दुस्तान…

खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है -अशफाकुल्लाह खा

ना सर झुका है कभी और ना झुकायेंगे कभी जो अपने दम पे जियो असल में जिंदगी है वही

मैं मुल्क की हिफाजत करूँगा ये मुल्क मेरी जान है इसकी रक्षा के लिए मेरा दिल और जां कुर्बान है..||

ना पूछो ज़माने को, क्या हमारी कहानी हैं हमारी पहचान तो सिर्फ ये हैं की हम सिर्फ हिंदुस्तानी हैं…!!