सुनो जान तुम मेरी पहली और आखरी पसंद नहीं बल्कि तुम मेरी एकलौती पसंद हो
ए इश्क़, तू ही बता, मैं तेरा अब, क्या हश्र करूँ - दिल जलाऊँ, आँखों से बहाऊँ, या रूह में क़ैद करूँ
क्या खबर थी की मुहब्बत हो जायेगी। हमें तो सिर्फ उनका मुस्कुराना अच्छा लगा था |
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
एक तरफा ही सही प्यार तो प्यार है, उसे हो ना हो लेकिन मुझे बेशुमार है.
छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़
सुनो जान तुम मेरी पहली और आखरी पसंद नहीं बल्कि तुम मेरी एकलौती पसंद हो
ए इश्क़, तू ही बता, मैं तेरा अब, क्या हश्र करूँ - दिल जलाऊँ, आँखों से बहाऊँ, या रूह में क़ैद करूँ
क्या खबर थी की मुहब्बत हो जायेगी। हमें तो सिर्फ उनका मुस्कुराना अच्छा लगा था |
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
एक तरफा ही सही प्यार तो प्यार है, उसे हो ना हो लेकिन मुझे बेशुमार है.
छूकर भी जिसे छू न सके, वो चाहत होती हैं इश्क़, कर दे फना जो रूह को, वो इबादत होती हैं इश्क़