नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं...जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं..
मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता
जाते वक्त बहोत गुरूर से कहा था उसने.... "तुम जैसे हजार मिलेंगे" मैंने मुस्कुरा कर कहा.... " मुझ जैसे की ही तलाश क्यों
मोहब्बत तो एक तरफा होती है.... जो हो दो तरफा तो....उसे नसीब कहते है....!!
सो जाया करो जल्दी कभी – कभी, ख्वाबो को तुम्हारा इंतज़ार रहता है
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा
नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं...जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं..
मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता
जाते वक्त बहोत गुरूर से कहा था उसने.... "तुम जैसे हजार मिलेंगे" मैंने मुस्कुरा कर कहा.... " मुझ जैसे की ही तलाश क्यों
मोहब्बत तो एक तरफा होती है.... जो हो दो तरफा तो....उसे नसीब कहते है....!!
सो जाया करो जल्दी कभी – कभी, ख्वाबो को तुम्हारा इंतज़ार रहता है
“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा