ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

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ऐ मोहब्बत तुझे पाने की कोई राह नहीं, शायद तू सिर्फ उसे ही मिलती है जिसे तेरी परवाह नही

अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है

हज़ारो मैं मुझे सिर्फ़ एक वो शख्स चाहिये ,, जो मेरी ग़ैर मौजूदगी मैं, मेरी बुराई ना सुन सके

प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है

तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए

ऐ मोहब्बत तुझे पाने की कोई राह नहीं, शायद तू सिर्फ उसे ही मिलती है जिसे तेरी परवाह नही

अगर हम सुधर गए तो उनका क्या होगा जिनको हमारे पागलपन से प्यार है

हज़ारो मैं मुझे सिर्फ़ एक वो शख्स चाहिये ,, जो मेरी ग़ैर मौजूदगी मैं, मेरी बुराई ना सुन सके

प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है

तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये

बुजदिल हें वो लोग जो मोहब्बत नहीं करते, बहुत हौसला चाहिए बर्बाद होने के लिए