ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया
तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है
तुम्हारे लिए मैने कुछ खास लिखा है। दूर कब तक रहोगे मुझसे खुदा ने किस्मत में मेरी तुम्हें मेरे पास लिखा हैं।।
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
तुम होते कौन हो मुझसे बिछड़ने वाले ?
प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है
ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया
तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है
तुम्हारे लिए मैने कुछ खास लिखा है। दूर कब तक रहोगे मुझसे खुदा ने किस्मत में मेरी तुम्हें मेरे पास लिखा हैं।।
तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है
तुम होते कौन हो मुझसे बिछड़ने वाले ?
प्यार भी कितना अजीब होता है न , वो चाहे कितनी भी तकलीफ दे पर सुकून उसी के पास मिलता है