सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…
सच्चे प्यार के लिए दूरियां मायने नहीं रखतीं
कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था !
किसी को भी नहीं चाहा मेने एक तुझे चाहने के बाद
कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है.... सुना है वो आज भी मेरी फिक्र किया करती है
सच्चे इश्क में अल्फाज़ से ज्यादा एहसास की एहमियत होती है
ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…
सच्चे प्यार के लिए दूरियां मायने नहीं रखतीं
कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर, एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था !
किसी को भी नहीं चाहा मेने एक तुझे चाहने के बाद
कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है.... सुना है वो आज भी मेरी फिक्र किया करती है