कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

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ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

प्यार का रिश्ता भी कितना अजीब होता है। मिल जाये तो बातें लंबी और बिछड़ जायें तो यादें लंबी

वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है

वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…

मोहब्बत तो एक तरफा होती है.... जो हो दो तरफा तो....उसे नसीब कहते है....!!

तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है

ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया

प्यार का रिश्ता भी कितना अजीब होता है। मिल जाये तो बातें लंबी और बिछड़ जायें तो यादें लंबी

वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है

वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…

मोहब्बत तो एक तरफा होती है.... जो हो दो तरफा तो....उसे नसीब कहते है....!!

तेरे चेहरे में ऐसा क्या है आखिर, जिसे बरसों से देखा जा रहा है