कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

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उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती

खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

तेरी यादे.... तेरी बाते.... बस तेरे ही फ़साने हैं... हाँ हम क़ुबूल करते हैं हम तेरे ही दीवाने .

इतना प्यार तो मैंने खुद से भी नहीं किया, जितना तुमसे हो गया है |

रिश्ता दिल में होना चाहिए शब्दों में नहीं और नाराजगी शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं।

उसकी मुहब्बत का सिलसिला भी क्या अजीब है, अपना भी नहीं बनाती और किसी का होने भी नहीं देती

खुद ही दे जाओगे तो बेहतर है..!वरना हम दिल चुरा भी लेते हैं..!

“अगर प्यार है तो शक़ कैसा …अगर नहीं है तो हक़ कैसा

तेरी यादे.... तेरी बाते.... बस तेरे ही फ़साने हैं... हाँ हम क़ुबूल करते हैं हम तेरे ही दीवाने .

इतना प्यार तो मैंने खुद से भी नहीं किया, जितना तुमसे हो गया है |

रिश्ता दिल में होना चाहिए शब्दों में नहीं और नाराजगी शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं।