कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

कहेते है इश्क ऐक गुनाह है जिसकी शरुआत दो बेगुनाहो से होती है.

Share:

More Like This

मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी

तुम दूर होकर ♥️ भी इतने अच्छे लगते हो, ना जाने पास होते तो कितने अच्छे लगते। ?

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

इश्क़ वो नहीं जो तुझे मेरा कर दे.... इश्क़ वो है जो तुझे किसी और का ना होने दे

कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो

मोहब्बत का एक फरिश्ता ऐसा मिला खुदा तो नही पर खुदा सा मिला

मेरी मुस्कान के लिये काफ़ी है याद तेरी

तुम दूर होकर ♥️ भी इतने अच्छे लगते हो, ना जाने पास होते तो कितने अच्छे लगते। ?

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

इश्क़ वो नहीं जो तुझे मेरा कर दे.... इश्क़ वो है जो तुझे किसी और का ना होने दे

कोई भी दीवारें मुझे तुमसे मिलने से ना रोक पाती, अगर तू मेरे साथ होती तो

मोहब्बत का एक फरिश्ता ऐसा मिला खुदा तो नही पर खुदा सा मिला