वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है

वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है

Share:

More Like This

काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

प्यार वही हैं ... जो दूर रहकर भी महसूस होता हैं

अपनापन छलके जिस की बातों में .. सिर्फ़ कुछ ही बंदे होते है लाखों में

*सच्चा रिश्ता एक अच्छी पुस्तक जैसा होता है, कितना भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते।*

प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है

काश मोहब्बत में भी चुनाव होते, गजब का भाषण देते तुम्हें पाने के लिए.

तुम्हें देखना और देखते रहना बड़ा अच्छा लगता है

प्यार वही हैं ... जो दूर रहकर भी महसूस होता हैं

अपनापन छलके जिस की बातों में .. सिर्फ़ कुछ ही बंदे होते है लाखों में

*सच्चा रिश्ता एक अच्छी पुस्तक जैसा होता है, कितना भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते।*

प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है