प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है
खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .
तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो
लापता होकर निकले थे मोहबत में तेरी, हमें कया पता था मशहूर हो जाएंगे
आँखो की चमक पलकों की शान हो तुम, चेहरे की हँसी लबों की मुस्कान हो तुम, धड़कता है दिल बस तुम्हारी आरज़ू मे, फिर कैसे ना कहूँ मेरी जान हो तुम..
वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…
प्यार की गहरायी की सीमा तब पता चलती है, जब बिछुड़ने का समय होता है
खोने की दहशत और पाने की चाहत न होती, तो ना ख़ुदा होता कोई और न इबादत होती .
तुम हर तरह से मेरे लिए ख़ास हो, शुक्रिया वो बनने के लिए जो तुम हो
लापता होकर निकले थे मोहबत में तेरी, हमें कया पता था मशहूर हो जाएंगे
आँखो की चमक पलकों की शान हो तुम, चेहरे की हँसी लबों की मुस्कान हो तुम, धड़कता है दिल बस तुम्हारी आरज़ू मे, फिर कैसे ना कहूँ मेरी जान हो तुम..
वो ना ही मिलते तो अच्छा था… बेकार में मोहब्बत से नफ़रत हो गई…