नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...
सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर, खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।
सच्चा प्यार किसी भूत की तरह होता है, बातें तो सब करते हैं दिखा किसी ने नहीं .
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये
आँसू आ जाते हैं आँखों में पर लबों पर हंसी लानी पड़ती है ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है
जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.
नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...
सफर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, नजर वहीं तक है जहाँ तक तुम हो, हजारों फूल देखे हैं इस गुलशन में मगर, खुशबू वहीं तक है जहाँ तक तुम हो।
सच्चा प्यार किसी भूत की तरह होता है, बातें तो सब करते हैं दिखा किसी ने नहीं .
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये
आँसू आ जाते हैं आँखों में पर लबों पर हंसी लानी पड़ती है ये मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो जिस से करते हैं उसी से छुपानी पड़ती है
जो इश्क़ दूरियों में भी बरकरार रहे वो, इश्क़ ही कुछ और होता है.