दिल के रिश्ते का कोई नाम नहीं होता, माना कि इसका कुछ अंजाम नहीं होता, अगर निभाने की चाहत हो दोनों तरफ, तो कसम से कोई रिश्ता नाकाम नहीं होता.
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
मिलावट का जमाना है साहिब,,,कभी हमारी हां में हां भी मिला दिया करो...
ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…
नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...
दिल के रिश्ते का कोई नाम नहीं होता, माना कि इसका कुछ अंजाम नहीं होता, अगर निभाने की चाहत हो दोनों तरफ, तो कसम से कोई रिश्ता नाकाम नहीं होता.
तू करे ना करे..... मेरा इश़्क काफ़ी है... हम दोनों के लिये
तू मिले या न मिले ये तो मुक़द्दर की बात है मगर सुकून बहुत मिलता है तुझे अपना सोच कर
मिलावट का जमाना है साहिब,,,कभी हमारी हां में हां भी मिला दिया करो...
ना कोई शिकायत, ना कोई ग़म.... तेरे ही थे ओर तेरे ही रहेगे हम…
नजर चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है तुम्हें प्यार करना...