जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना

जानते हो मोहब्बत किसे कहते हैं किसी को दिल से चाहना उसे हार जाना और फिर खामोश रहना

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मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

प्यार का रिश्ता भी कितना अजीब होता है। मिल जाये तो बातें लंबी और बिछड़ जायें तो यादें लंबी

ख्वाब तो मीठे देखे थे... ताज्जुब हैं... आखों का पानी खारा कैसे हो गया...!

उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ

यूँ तो शिकायते तुझ से सैंकड़ों हैं मगर, तेरी एक मुस्कान ही काफी है सुलह के लिये.

खामोशियाँ बोल देती हैं जिनकी बाते नहीं होती, इश्क़ वो भी करते हैं जिनकी मुलाक़ाते नहीं होती

मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे,अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

प्यार का रिश्ता भी कितना अजीब होता है। मिल जाये तो बातें लंबी और बिछड़ जायें तो यादें लंबी

ख्वाब तो मीठे देखे थे... ताज्जुब हैं... आखों का पानी खारा कैसे हो गया...!

उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ

यूँ तो शिकायते तुझ से सैंकड़ों हैं मगर, तेरी एक मुस्कान ही काफी है सुलह के लिये.

खामोशियाँ बोल देती हैं जिनकी बाते नहीं होती, इश्क़ वो भी करते हैं जिनकी मुलाक़ाते नहीं होती