ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
सबका दिल रखने में, अक्सर मेरा दिल टूट जाता है.
दुआ हैं हर किसी को कोई ऐसा मिले जो उसे कभी रोने ना दे
हद से बढ़ जाये तालुक तो गम मिलते हैं.. हम इसी वास्ते अब हर शख्स से कम मिलते हँ..