कुछ अलग सा है अपनी मौहबत का हाल... तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही... लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं...
माना मोहब्बत में होता नहीं जब्र, मगर बिन तेरे इस दिल को भी कहाँ है सब्र
मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे
कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके
कुछ अलग सा है अपनी मौहबत का हाल... तेरी चुपी और मेरा सवाल ....!!!!
शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही... लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं...
माना मोहब्बत में होता नहीं जब्र, मगर बिन तेरे इस दिल को भी कहाँ है सब्र
मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे
कभी कभी हम गलत नहीं होते, बस वो शब्द ही नहीं होते जो हमें सही साबित कर सके