मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही... लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं...
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....
वो लोग क्यों मिलते ही दिल में उतर जाते है, जिन लोगो से किस्मत के सितारे नहीं मिलते
मै उसके लिए चाय बनाना सीखता रहा और वो पैग बनाने वाले के साथ भाग गई
कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही... लेकिन रवैये अजनबी हो जाये तो बडी तकलीफ देते हैं...
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की, झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है....
वो लोग क्यों मिलते ही दिल में उतर जाते है, जिन लोगो से किस्मत के सितारे नहीं मिलते