हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
इंसान अपने कर्म से बड़ा होता है, अपने जन्म से नहीं .
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं, हम अकेले थे अकेले ही रह जाते हैं, दिल का दर्द किसे दिखाएं, मरहम लगाने वाले ही जख्म दे जाते हैं |
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
हम नादान ही अच्छे हैं दुनिया के समझदार लोगों से, हम अपने ख़्वाब जरूर तोडते हैं पर किसी का दिल नही
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
जब दर्द सहने की आदत हो जाती है ना, तोह असू आना खुद ही बंद हो जाते है |
इंसान अपने कर्म से बड़ा होता है, अपने जन्म से नहीं .
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं, हम अकेले थे अकेले ही रह जाते हैं, दिल का दर्द किसे दिखाएं, मरहम लगाने वाले ही जख्म दे जाते हैं |
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था