क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा
उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
अकेली रात .. बोलती बहुत है लेकिन सुन वही सकता है जो खुद भी अकेला हो .
उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते ,, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा
उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?