किसी को इतना IGNORE मत करो की वह तुम्हारे बिना जीना सिख जाए

किसी को इतना IGNORE मत करो की वह तुम्हारे बिना जीना सिख जाए

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उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ

उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?

माना मोहब्बत में होता नहीं जब्र, मगर बिन तेरे इस दिल को भी कहाँ है सब्र

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..

उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ

उसने कहा भूल जाओ मुझे, हमने कह दिया, कौन हो तुम ?

माना मोहब्बत में होता नहीं जब्र, मगर बिन तेरे इस दिल को भी कहाँ है सब्र

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..

अपने रब के फैसले पर भला शक कैसे करुँ सजा दे रहा है अगर वो कुछ तो गुनाह रहा होगा..