मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......
ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे
कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
जिन्हे भी मुझसे मिलने का वक़्त नहीं मिलता देख लेना एक दिन होगा जब मैं इतना दूर चला जाऊंगा की तुम्हे मुझसे मिलने का मौका भी नहीं मिलेगा।
मेरे ग़म को कोई नहीं समझ सका क्यों के मुझे आदत थी मुस्कराने की
रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......
ग़म इस बात का नहीं की आप मिल न सकेंगे, दर्द इस बात का है की हम आपको भुला न सकेंगे
कोई भी सफर कभी खत्म नही होता या तो रास्ता बदल जाता है या फिर वास्ता ख़त्म हो जाता है
जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा
जिन्हे भी मुझसे मिलने का वक़्त नहीं मिलता देख लेना एक दिन होगा जब मैं इतना दूर चला जाऊंगा की तुम्हे मुझसे मिलने का मौका भी नहीं मिलेगा।