शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

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कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था

नाकाम मोहबत्त भी बड़े काम की होती है, दिल मिले ना मिले इलज़ाम जरुर मिल जाता है।।

"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!

कोई अपना सा क्या लगा एक बार, किस्मत ने तो बुरा ही मान लिया

हमे पता है तुम कहीं और के मुसाफिर हो हमारा शहर तो बस यूँ ही रस्ते में आया था

नाकाम मोहबत्त भी बड़े काम की होती है, दिल मिले ना मिले इलज़ाम जरुर मिल जाता है।।

"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."

रिश्ते धीरे धीरे ही खत्म होते हैं बस पता अचानक सा चलता हैं .

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं.. किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!