आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है
एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है
इतिहास गवाह है- 'खबर' हो या 'कबर' खोदते हमेशा अपने ही हैं|
पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ
जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......
एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!
आंसू जता देते है "दर्द" कैसा है, "बेरूखी" बता देती है "हमदर्द" कैसा है
एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है
इतिहास गवाह है- 'खबर' हो या 'कबर' खोदते हमेशा अपने ही हैं|
पुछा किसी ने की याद आती है उसकी में मुस्कुराया और बोला तभी तो ज़िंदा हूँ
जरुरत से ज्यादा उम्मीद भी रिश्ते टुटने की वजह बन जाती है......
एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!