एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया
सारी दुनिया के रुठ जाने से मुझे कोई दुख नहीं, बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है.
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए
एक खेल रत्न उसको भी दे दो, बड़ा अच्छा खेलती है वो दिल से
काश आंसूं के साथ यादें बाह जाती .. तो एक दिन तसली के साथ बैठ कर रो लेता ...
डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
बहुत शोक था दुसरो को खुश रखने का होश तब आया जब खुद को अकेला पाया
सारी दुनिया के रुठ जाने से मुझे कोई दुख नहीं, बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है.
“वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए, कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए