जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |
सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..
चारो और देख लिया मैंने ना मुझे मेरा कोई दिखा ना मेरे जैसा कोई दिखा।
जब लोग बदल सकते हैं तो किस्मत क्या चीज है | |
सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना..सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है
ज़िन्दगी चैन से गुज़र जाए , तू अगर ज़हन से उतर जाए
मुझमें ही हौसला नहीं वरना .. छत का पंखा पुकारता है मुझे....
उदास कर देती है.. हर रोज ये शाम..ऐसा लगता है जैसे भूल रहा है कोई.. धीरे- धीरे..
चारो और देख लिया मैंने ना मुझे मेरा कोई दिखा ना मेरे जैसा कोई दिखा।