जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

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कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे धीरे .. तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है .

हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही

कुछ पल के लिए मुझे अपनी बाँहों में सुला दे अगर आँख खुली तो उठा देना और अगर न खुली तो दफना देना

थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.

एक थी समझने वाली मुझे ... अब वो भी समझदार हो गयी है

अजीब दस्तूर है, मोहब्बत का, रूठ कोई जाता है, टूट कोई जाता है

माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे धीरे .. तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएं भी हैरान है .

हर बात पे ताना, हर अंदाज़ में गुस्सा, साफ़ क्यों नहीं कहते की मोहब्बत नहीं रही