जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

जब मिलती ही नहीं...तो मोहब्बत होती क्यूँ है...!!!

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कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।

जो कदर नहीं करता उसके लिए तुम रोते हो, जो तुम्हरी कदर करता है तुम रुलाते हो

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

रुलाती है मगर रोने का नहीं.

चलो अब जाने भी दो....क्या करोगे दास्तां सुनकर,,, ख़ामोशी तुम समझोगे नही....और बयां हमसे होगा नही

जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......

कई बार ऐसा भी होता है के ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी इंसान की खुशियां छीन लेता है।

जो कदर नहीं करता उसके लिए तुम रोते हो, जो तुम्हरी कदर करता है तुम रुलाते हो

शक तो था मोहब्बत में नुक़सान होगा, पर सारा हमारा ही होगा ये मालूम न था

रुलाती है मगर रोने का नहीं.

चलो अब जाने भी दो....क्या करोगे दास्तां सुनकर,,, ख़ामोशी तुम समझोगे नही....और बयां हमसे होगा नही

जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......