उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
एक फ़क़ीर ने कहा था चिंता ना कर वो भी रोएगा जो आज तुझे रुला रहा है
ना मुलाक़ात याद रखना, ना पता याद रखना, बस इतनी सी आरज़ू है, मेरा नाम याद रखना.
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .
उँगलियाँ निभा रही हैं रिश्ते आजकल ज़ुबाँ से निभाने का वक्त कहाँ
हमे पता है की तुम कहीं और के मुसाफिर हो, हमारा शहर तो यूँ ही बिच में आया था
एक फ़क़ीर ने कहा था चिंता ना कर वो भी रोएगा जो आज तुझे रुला रहा है
ना मुलाक़ात याद रखना, ना पता याद रखना, बस इतनी सी आरज़ू है, मेरा नाम याद रखना.
रोता देखकर वो ये कह के चल दिए कि, रोता तो हर कोई है क्या हम सब के हो जाएँ
गिरते हुए पत्त्तों ने मुझे यह समझाया हैं बोझ बन जाओ तो अपनो भी गिरा देते हैं .