शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे
थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.
किस मुकाम पर ले आई है ये मोहब्बत हमे उसे पाया भी नहीं जाता और भुलाया भी नहीं जाता
काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..
वो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से, वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने से
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
तमाशा बन गयी है ज़िन्दगी कुछ कहे तो भी बुरे और कुछ न कहे तो भी बुरे
थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.
किस मुकाम पर ले आई है ये मोहब्बत हमे उसे पाया भी नहीं जाता और भुलाया भी नहीं जाता
काटे तो नसीब में आने ही थे.. फूल जो गुलाब चुना था हमने..
वो कभी डरा ही नहीं मुझे खोने से, वो क्या अफसोस करेगा मेरे ना होने से