दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो

दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो

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जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा

जिस रात की कभी कोई सुबह नही होती हर रात उस रात का इंतेज़ार रहता है.......

अब अगर रूठे तो रूठे रहना मैं मनाने वाला हुनर भूल चुकी हूं

जो प्यार नहीं सच्चा उसे भूल जाना ही अच्छा

कल जितनी हसरत थी तुझे पाने की आज उतनी हसरत है तुझे भूल जाने की

बदल जाते है वो लोग वक़्त की तरह जिन्हे हद सा ज्यादा वक़्त दिया जाता है....

जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा