यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर, आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है.
बिन कहें मेैं समझ जाउ, वो अहसांस हो तुम
यूँ तो आदत नहीं मुझे मुड़ के देखने की..तुम्हें देखा तो लगा..एक बार और देख लूँ
जब मेरे पास कोई नही था..तब मेरा साथ निभाने का शुक्रिया
मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता
तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है
धड़कनों को भी रास्ता दे दीजिये हुजूर, आप तो पूरे दिल पर कब्जा किये बैठे है.
बिन कहें मेैं समझ जाउ, वो अहसांस हो तुम