जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ, मुस्कुराते हुए तुम्हारे पुराने मेसेज और चिट्ठियां दोबारा दोबारा पढता हूँ ! हाँ ! तुमसे इतना प्यार करता हूँ मैं
तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी
नशा कोई भी हो जान लेवा ही होता है ..यकीन तब हुआ जब तेरी लत लगी...??
कितने कम लफ्जों मे जिंदगी को बयान करूँ, लो तुम्हारा नाम लेकर किस्सा तमाम करूँ
जैसे प्यार से सभी चीज़ें आसान लगती हैं, उसी तरह उम्मीद से सब कुछ संभव लगने लगता है
फिर ग़लतफैमियो में डाल दिया.. जाते हुए मुस्कुराना ज़रूरी था
जब भी मैं तुमसे दूर होता हूँ, मुस्कुराते हुए तुम्हारे पुराने मेसेज और चिट्ठियां दोबारा दोबारा पढता हूँ ! हाँ ! तुमसे इतना प्यार करता हूँ मैं
तुमने ना सुनी धडकन हमारी पर हमने महसूस की सांस तुम्हारी
नशा कोई भी हो जान लेवा ही होता है ..यकीन तब हुआ जब तेरी लत लगी...??
कितने कम लफ्जों मे जिंदगी को बयान करूँ, लो तुम्हारा नाम लेकर किस्सा तमाम करूँ
जैसे प्यार से सभी चीज़ें आसान लगती हैं, उसी तरह उम्मीद से सब कुछ संभव लगने लगता है
फिर ग़लतफैमियो में डाल दिया.. जाते हुए मुस्कुराना ज़रूरी था