ख्वाब तो मीठे देखे थे... ताज्जुब हैं... आखों का पानी खारा कैसे हो गया...!

ख्वाब तो मीठे देखे थे... ताज्जुब हैं... आखों का पानी खारा कैसे हो गया...!

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तुम ही वजह मेरे खालीपन की.. और.. तुम्ही गूंजते हो मुझमें हरदम !

मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता

तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है

हम तो मोहबत के नाम से भी अनजान थे, एक शख्स की चाहत ने पागल बना दिया

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर तुम साथ रहना, चाहे दूर रहो पर हमेशा दिल के पास रहना

तुम ही वजह मेरे खालीपन की.. और.. तुम्ही गूंजते हो मुझमें हरदम !

मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन हर कोई आप सब की तरह अनमोल नहीं होता

तुम मेरी वो किताब हो, जिसका हर लफ्ज़ मुझे ज़बानी याद है

हम तो मोहबत के नाम से भी अनजान थे, एक शख्स की चाहत ने पागल बना दिया

ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर तुम साथ रहना, चाहे दूर रहो पर हमेशा दिल के पास रहना