दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
वो जो हमसे नफरत करते हैं, हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,
कभी जिंदगी के धागे टूट जाए तो हमारे पास आना..हम हौसलों के दर्जी है मुफ्त में रफू करते हैं....|
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."
दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
कीमत दोनों की चुकनी पड़ती है, बोलने की भी और चुप रहने की भी ..!!
वो जो हमसे नफरत करते हैं, हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,
कभी जिंदगी के धागे टूट जाए तो हमारे पास आना..हम हौसलों के दर्जी है मुफ्त में रफू करते हैं....|
कुछ अजीब सा रिश्ता है उसके और मेरे दरमियां, ना नफरत की वजह मिल रही है ना मोहब्बत का सिला.
"जब हम रिश्तो के लिए वक़्त नहीं निकाल पाते तो वक़्त हमारे बीच से रिश्तो को निकाल देता है."