जहर में उतना जहर नहीं होगा, जितना जहर कुछ लोग दूसरों के लिए अपने अंदर रखते है
एक दिमाग वाला दिल मुझे भी दे दे ख़ुदा, ये दिल वाला दिल सिर्फ़ तकलीफ़ ही देता हैं..
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है एक दिन रात उदास होगी और हम गुज़र जाएंगे
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...
जहर में उतना जहर नहीं होगा, जितना जहर कुछ लोग दूसरों के लिए अपने अंदर रखते है
एक दिमाग वाला दिल मुझे भी दे दे ख़ुदा, ये दिल वाला दिल सिर्फ़ तकलीफ़ ही देता हैं..
खुदा जाने कोनसा गुनाह कर बैठे हैं हम कि तम्मनाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं
शब्द केवल चुभते है, खमोशियाँ मार देती हैं.
हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है एक दिन रात उदास होगी और हम गुज़र जाएंगे
तेरी नाराज़गी वाजिब है दोस्त.. मैं भी खुद से खुश नहीं हूं आजकल...