थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.
एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!
सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....
थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो इजहार नहीं करता.
एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!
सब समेट कर बढ़ते रहना ..नदियों तुमसे सीख न पाया !
सिलसिला आज भी वही जारी है, तेरी याद, मेरी नींदों पर भारी है
गुज़र गया आज का दिन भी पहले की तरह ना हमे फुरसत मिली ना उन्हे ख्याल आया .
किताबों सी शख्सियत दे दे मालिक...सब कुछ बोल दूँ खामोश रहकर....