कभी किसी का जो होता था इंतज़ार हमें, बड़ा ही शाम-ओ-सहर का हिसाब रखते थे..

कभी किसी का जो होता था इंतज़ार हमें, बड़ा ही शाम-ओ-सहर का हिसाब रखते थे..

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वह मुझ से पूछते , किस किस के ख्वाब देखती हो .. ? बे-खबर जानते नहीं, उसकी यादें मुझे सोने ही नहीं देतीं ..

निगाहों में दूसरा कोई आए ही न पाया, भरोसा ही कुछ ऐसा था – तेरे लौट आने का..

न कर ज़िद अपनी हद में रह ए दिल वो बड़े लोग है अपनी मर्ज़ी से याद करते है

वफ़ा का नाम न लो यारो, वफ़ा दिल को दुकहाती है, जब भी वफ़ा का नाम लेते है, हमे एक बेवफा की याद आती है.

भले ही तुझसे आज दूर हूँ पगली, लेकिन तेरी फिक्र करना मुझे आज भी अच्छा लगता है..

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें

वह मुझ से पूछते , किस किस के ख्वाब देखती हो .. ? बे-खबर जानते नहीं, उसकी यादें मुझे सोने ही नहीं देतीं ..

निगाहों में दूसरा कोई आए ही न पाया, भरोसा ही कुछ ऐसा था – तेरे लौट आने का..

न कर ज़िद अपनी हद में रह ए दिल वो बड़े लोग है अपनी मर्ज़ी से याद करते है

वफ़ा का नाम न लो यारो, वफ़ा दिल को दुकहाती है, जब भी वफ़ा का नाम लेते है, हमे एक बेवफा की याद आती है.

भले ही तुझसे आज दूर हूँ पगली, लेकिन तेरी फिक्र करना मुझे आज भी अच्छा लगता है..

याद आती है अब भी उनकी हमें हद से ज्यादा.. मगर वो याद ही नही करते तो हम क्या करें