जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं
कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही जो, जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही.याद वो नहीं जो अकेले में आये, याद वो है जो महफिल में आये और अकेला कर जाए ||
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
जब ऑंसू गिरने बंद हो जाये तोह तकलीफ गुस्सा बन क बाहर अति है
रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है
जिनको साथ नहीं देना होता वो अक्सर रूठ जाया करते हैं
कोई तो होगा टूटा हुआ मेरी तरह ही जो, जुड़ने की ख्वाहिश लिए जी रहा होगा अकेला कही.याद वो नहीं जो अकेले में आये, याद वो है जो महफिल में आये और अकेला कर जाए ||
क्या इतने दूर निकल आये हैं हम, कि तेरे ख्यालों में भी नही आते ?
जब ऑंसू गिरने बंद हो जाये तोह तकलीफ गुस्सा बन क बाहर अति है
रिश्ते वो होते हैं जिसमे शब्द कम और समझ ज्यादा हो......
किस हक़ से माँगहु अपने हिस्से का वक़त आपसे, क्यूंकि न आप मेरे हो और न ही वक़त मेरा है