दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
उसके बदलने का कोई दुःख नहीं, बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूं
चारो और देख लिया मैंने ना मुझे मेरा कोई दिखा ना मेरे जैसा कोई दिखा।
जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
क्यूँ दुनिया वाले प्यार को ईश्वर का दर्जा देते है ? मैंने तो आज तक नहीं सुना कि ईश्वर ने बेवफ़ाई की हो !!
दिल को कागज समझ रखा है क्या.. आते हो, जलाते हो, चले जाते हो
उसके बदलने का कोई दुःख नहीं, बस अपने ऐतबार पर शर्मिंदा हूं
चारो और देख लिया मैंने ना मुझे मेरा कोई दिखा ना मेरे जैसा कोई दिखा।
जवाब तो हर बात का दिया जा सकता है, मगर जो रिश्तो की अहमियत ना समझ पाया वह शब्दों को क्या समझेगा
जब 'मतलब' ना होतो लोग बोलना तो दूर देखना तक छोड़ देते है .
क्यूँ दुनिया वाले प्यार को ईश्वर का दर्जा देते है ? मैंने तो आज तक नहीं सुना कि ईश्वर ने बेवफ़ाई की हो !!