तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!

तकलीफे तो हजारो है इस ज़माने में| बस कोई अपना नज़र अंदाज करे तो बर्दाश्त नहीं होती !!

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दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे

जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…

तुम मोहबत भी मौसम की तरह निभाते हो, कभी बरसते हो कभी एक बूंद को तरसाते हो

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया

दर्द सहने की कुछ यु आदत सी हो गई है.... की अब दर्द न मिले तो दर्द सा होता है

एहसासों की नमी बेहद जरुरी है हर रिश्ते में ,,रेत भी सूखी हो तो हाथों से फिसल जाती है !!

मुझको धुंड लेता है रोज किसी बहानोंसे दर्द हो गया है वाक़िफ़ मेरे ठीकानोंसे

जब से वो मशहूर हो गये हैं, हमसे कुछ दूर हो गये हैं…

तुम मोहबत भी मौसम की तरह निभाते हो, कभी बरसते हो कभी एक बूंद को तरसाते हो

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो..... और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया