माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
विश्व का कण कण शिव मय हो अब हर शक्ति का अवतार उठे जल थल और अम्बर से फिर बम बम भोले की जय जयकार उठे
लोग पूछते हैं – “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया – “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नज़र आती है ?”
जब भी मैं अपने बुरे हालातो से घबराता हूँ, तब मेरे महाकाल की आवाज आती है, रूक मैं अभी आता हूँ । **जय महाकाल**
शिव की ज्योति से नूर मिलता है, सबके दिलों को सुरुर मिलता है, जो भी जाता है भोले के द्वार उसको कुछ न कुछ जरूर मिलता है ।
दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।
माया को चाहने वाला बिखर जाता है, और महाकाल को चाहने वाला निखर जाता है ।
विश्व का कण कण शिव मय हो अब हर शक्ति का अवतार उठे जल थल और अम्बर से फिर बम बम भोले की जय जयकार उठे
लोग पूछते हैं – “कौन-सी दुनिया में जीते हो ?” हमने भी कह दिया – “महाकाल कि भक्ति में दुनिया कहा नज़र आती है ?”
जब भी मैं अपने बुरे हालातो से घबराता हूँ, तब मेरे महाकाल की आवाज आती है, रूक मैं अभी आता हूँ । **जय महाकाल**
शिव की ज्योति से नूर मिलता है, सबके दिलों को सुरुर मिलता है, जो भी जाता है भोले के द्वार उसको कुछ न कुछ जरूर मिलता है ।
दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।