कोशिशें मेरी हर रोज नाकाम हो जाती है… ? यादें तेरी जकड़ ही लेती है शाम होते-होते!!
कोई वादा नहीं फिर भी तेरे इंतज़ार में हैं, जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार हैं, तेरे चहेरे की उदासी दे रही हैं, गवाही मुझसे मिलने को तू अब भी बेकरारहैं
कहा खो गये है आप, या सो गये है आप, बेवफा तो लगते नही थे पहले, क्या अब हो गये है आप..
शाम होते ही चिरागों को भुजा देती हूँ, दिल ही काफ़ी है तेरी याद में जलने क लिए ..
कैसे करूं मैं साबित… कि तुम याद बहुत आते हो, एहसास तुम समझते नहीं और अदाएं हमें आती नहीं…
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
कोशिशें मेरी हर रोज नाकाम हो जाती है… ? यादें तेरी जकड़ ही लेती है शाम होते-होते!!
कोई वादा नहीं फिर भी तेरे इंतज़ार में हैं, जुदाई के बाद भी तुझसे प्यार हैं, तेरे चहेरे की उदासी दे रही हैं, गवाही मुझसे मिलने को तू अब भी बेकरारहैं
कहा खो गये है आप, या सो गये है आप, बेवफा तो लगते नही थे पहले, क्या अब हो गये है आप..
शाम होते ही चिरागों को भुजा देती हूँ, दिल ही काफ़ी है तेरी याद में जलने क लिए ..
कैसे करूं मैं साबित… कि तुम याद बहुत आते हो, एहसास तुम समझते नहीं और अदाएं हमें आती नहीं…
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…