दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बडी तड़पाती है, क्या करू यार तेरी याद ही जो इतनी आती है.

दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बडी तड़पाती है, क्या करू यार तेरी याद ही जो इतनी आती है.

Share:

More Like This

इंतज़ार भी है उमीद भी है वफ़ा भी है, बस तुमसे मिलने का नसीब नहीं.. "I Miss You"

I’m incomplete without You

दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है ।

बस जीने ही तो नही देगी.. और क्या कर लेगी यादें तेरी..

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर..

तेरी याद आती है तो आँख भर ही आती है, वरना हर बात पर यूँ रोने की आदत नहीं मुझे !!

इंतज़ार भी है उमीद भी है वफ़ा भी है, बस तुमसे मिलने का नसीब नहीं.. "I Miss You"

I’m incomplete without You

दुनियाँ भर की यादें हम से मिलने आती है, शाम ढले इस सूने घर में मेला सा लगता है ।

बस जीने ही तो नही देगी.. और क्या कर लेगी यादें तेरी..

इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है, लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर..

तेरी याद आती है तो आँख भर ही आती है, वरना हर बात पर यूँ रोने की आदत नहीं मुझे !!