बंद आँखों में मेरी चले आते हो तुम अपनों की तरह, आँख खुलते ही तुम खो जाते हो कहीं सपनो की तरह..
नींद आये न आये रातों को,, मग़र,,उनकी याद,,बराबर आती रहती है।।
वह मुझ से पूछते , किस किस के ख्वाब देखती हो .. ? बे-खबर जानते नहीं, उसकी यादें मुझे सोने ही नहीं देतीं ..
कब तक बहाना बनाता रहूँ आँख में कचरा चले जाने का, लो आज सरेआम कहता हूँ के, मैं तुझे याद करके रोता हूँ..
-तुझ से न मिलने की क़सम खा कर भी, हर राह में तुझे ढूंडा है मैंने ..
दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बडी तड़पाती है, क्या करू यार तेरी याद ही जो इतनी आती है.
बंद आँखों में मेरी चले आते हो तुम अपनों की तरह, आँख खुलते ही तुम खो जाते हो कहीं सपनो की तरह..
नींद आये न आये रातों को,, मग़र,,उनकी याद,,बराबर आती रहती है।।
वह मुझ से पूछते , किस किस के ख्वाब देखती हो .. ? बे-खबर जानते नहीं, उसकी यादें मुझे सोने ही नहीं देतीं ..
कब तक बहाना बनाता रहूँ आँख में कचरा चले जाने का, लो आज सरेआम कहता हूँ के, मैं तुझे याद करके रोता हूँ..
-तुझ से न मिलने की क़सम खा कर भी, हर राह में तुझे ढूंडा है मैंने ..
दिन भी ठीक से नहीं गुजरता और रात भी बडी तड़पाती है, क्या करू यार तेरी याद ही जो इतनी आती है.