“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”
“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"
उस से तार्रुफ़ तो करा दो मेरा ….. बस अजनबी कह के मिलाना मुझको !!!
वफ़ा का नाम न लो यारो, वफ़ा दिल को दुकहाती है, जब भी वफ़ा का नाम लेते है, हमे एक बेवफा की याद आती है.
दिल को तेरी ही तमन्ना दिल को है तुझसे ही प्यार चाहे तू आये.. या न आये हम करेंगे इंतज़ार..
अपनी नाराज़गी की कोई वजह तोह बतायी होती, हम दुनिया छोड़ देते तुझे मनाने के लिये ..
“एक सिलसिले की उमीद थी जिनसे, वही फ़ासले बनाते गये, हम तो पास आने की कोशिश मे थे, जाने क्यूँ वो दूरियाँ बढ़ाते गये.”
“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"
उस से तार्रुफ़ तो करा दो मेरा ….. बस अजनबी कह के मिलाना मुझको !!!
वफ़ा का नाम न लो यारो, वफ़ा दिल को दुकहाती है, जब भी वफ़ा का नाम लेते है, हमे एक बेवफा की याद आती है.
दिल को तेरी ही तमन्ना दिल को है तुझसे ही प्यार चाहे तू आये.. या न आये हम करेंगे इंतज़ार..
अपनी नाराज़गी की कोई वजह तोह बतायी होती, हम दुनिया छोड़ देते तुझे मनाने के लिये ..