कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
सुनो तुम बदल गए हो क्या या तुम थे ही ऐसे .. ‘
किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है
“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"
तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘
कोशिशें मेरी हर रोज नाकाम हो जाती है… ? यादें तेरी जकड़ ही लेती है शाम होते-होते!!
कैसे करूँ मैं साबित…कि तुम याद बहुत आते हो… एहसास तुम समझते नही…और अदाएं हमे आती नहीं…
सुनो तुम बदल गए हो क्या या तुम थे ही ऐसे .. ‘
किसी नजर को तेरा इंतज़ार आज भी है कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है
“कैसे बयां करू अल्फाज नहीं है” “दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है” “पूछते हो कि मुझे दर्द क्या है” “दर्द ये है की तू मेरे पास नहीं है"
तुम हकीकत’इ-इश्क़ हो या फरेब मेरी आँखों का, न दिल से नीकलते हो न ज़िन्दगी मैं आते हो .. ‘
कोशिशें मेरी हर रोज नाकाम हो जाती है… ? यादें तेरी जकड़ ही लेती है शाम होते-होते!!