शाम होते ही चिरागों को भुजा देती हूँ, दिल ही काफ़ी है तेरी याद में जलने क लिए ..
कब तक बहाना बनाता रहूँ आँख में कचरा चले जाने का, लो आज सरेआम कहता हूँ के, मैं तुझे याद करके रोता हूँ..
तुम्हे ना देख कर कबतक सब्र करूँ, आँखे तो बँद कर लूँ पर इस दिल का क्या करूँ?
~हम चाह कर भी पूछ ही नई पाते उनका हाल, डरते हैं कहीं यह न केहड़ी वह, तुम्हे यह हक किसने दिया .. ?
दिल ने आज फिर तेरे दीदार की ख्वाहिश रखी है, अगर फुरसत मिले तो ख्वाबों मे आ जाना.. "I Miss You"
चाँद को गुरूर है क्योंकि उसके पास नूर है, मैं किस पर गुरूर करूँ मेरा चाँद ही मुझसे दूर है..
शाम होते ही चिरागों को भुजा देती हूँ, दिल ही काफ़ी है तेरी याद में जलने क लिए ..
कब तक बहाना बनाता रहूँ आँख में कचरा चले जाने का, लो आज सरेआम कहता हूँ के, मैं तुझे याद करके रोता हूँ..
तुम्हे ना देख कर कबतक सब्र करूँ, आँखे तो बँद कर लूँ पर इस दिल का क्या करूँ?
~हम चाह कर भी पूछ ही नई पाते उनका हाल, डरते हैं कहीं यह न केहड़ी वह, तुम्हे यह हक किसने दिया .. ?
दिल ने आज फिर तेरे दीदार की ख्वाहिश रखी है, अगर फुरसत मिले तो ख्वाबों मे आ जाना.. "I Miss You"
चाँद को गुरूर है क्योंकि उसके पास नूर है, मैं किस पर गुरूर करूँ मेरा चाँद ही मुझसे दूर है..